Maa Kaalratri Ki Gatha

🧑‍🎤: Rinky Vishwakarma

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⏱: 00:00:00 AM 25/03/2026

جے جے مو، جے جے
مو، جے جے کال راکری مو
कल रात्री की कथा प्रिवाद प्रिवाद
सुनूलगा कि द्ध्याँ
सुनूलगा की ध्याँ
रोप्राणी महराणी।
घेजे काल राकी मां
नयलाśेकु अइलमुणि राच मस्फिननाfull
गुरूद्राणी महराणी जैजैका रात्रिमा
श्री गणेश का वन्दन करके
शारद का भिनन्दन करके
गुरूद्राणी कोशीश नवावं
दोवरदानम कलम चलावं
हन्सवाहिनी
वीडा धारणी
सरस्वती मासमे सारणी
शम्दो के भंडार खोल दो
ज्यान के
सारे द्वार खोल दो
चरण शरण सुखदेव तुमारे
करो दयामा दास पुकारे
गाथा गाऊँ काल रात्रिकी
गाथा गाऊँ काल रात्रिकी
दिवस सात्वा नवरात्रिका केहलाई मा काल रात्रिमा
असुरो केले काल रात्रिमा ताहे काल समाल
रोध्राणी महराणी जैज़े काल रात्रिमा
माता चार भुजाओवाली माता दिव्यकलाओवाली
हात खडग मा धारण करती सबके कश्ट
निवारण करती
काल रात्रिमहकाली है मा बनशल शक्ति शाली
है मा
जब जब असुर धरापे आए अपना अत्याचार बढ़ाए
तब तब आए असुर मर्दिनी काल काल का असुर मर्दिनी
शुम्भ निशुम्भ असुर दो भाई असुर बड़े ही थे बलशाई
काल
तीनो लोक पर भारी थे वो एसे अत्याचारी थे
वो चंड मुंद दानव बलशाली
महाविनाशी
शक्ती शाली
बिना बात तलवार चलाते
जिसको देखते
मार गिराते
रिशी, मुनी, साधो,
सन्यासी
उनसे दुखी सारे बनवासी
हवन यज्य ना होने देते पूजपाठ ना होने देते विघन डालते विघन कारी
महाविनाशी मान
सहारी स्वर्गलोक
आधीन थाऊनके सिंगहासन आधीन थाऊनके
मा
मान सहारी
मदिराहारी उतपाती और अत्याचारी कहीं बचा ना कोई दवाले
प्रान बचाते फिरे देवता
तीलोलोक में संकत चाया भैका काला
बादल चाया
कोई नहीं बचाने
वाला असुरो कुमार गिराने वाला
बिलक बिलक रोती गौ
माता कोई हमारा नहीं विधाता
शुम्भन शुम्भ से कौन बचाए
चंड मुंड अगनी बरसाए
रक्त बीज वरदानी दानव
बलशाले अभिमानी दानव
रक्त बीज की सुनो कहानी
ऐसा है दानव वरदानी
रक्त जो उसका गिरे धरापर
रक्त बीज ही बने वहापर
रक्त की बूंदे जितनी गिरती
रक्त बीज की छवे उभरती
रक्त बीज बनते जाते थे एक साथ हसते जाते थे
रक्त बीज को कौन संघारे कोई नहीं जो इसको मारे
कोई नहीं जो इसको मारे वो भी है हैरान देखके जिसने दिया वरदान
रोधराणी कल्याणी जै जै काल रात्रि माँ
सारे देवता मुह लटकाए सारे देवता मुह लटकाए
आधिशक्ति के पास थे आए
आधिशक्ति के पास थे आए
पारवती से करे प्रातना
पारवती से करे प्रातना हाथ जोड़के करे याचना हाथ जोड़के करे याचना
आधिशक्ति मा आधिभवानी जगजननी माता
कल्याणी हे माता कल्याण
करोतों इन दुष्टों के प्राण
हरोतों रक्त बीज को संहारो मा इन दुष्टों को तुम मारो मा
कोई नहीं है सिवा तुमारे जो इस दानव दल को
मारे
वरना शृष्टी नहीं बचेगी आवन पृत्वी नहीं बचेगी
पार्वती मा क्रोध में आई
शेर के जैसे
मा गुर्राई
इन असुरो का काल बनूँगी
काल नहीं महकाल बनूँगी
बिजली बनके तूट पडूँगी
बनके जौला फूट पडूँगी रण में इनका नाश करूँगी
मैं असुरो का विनाश करूँगी चिंता छोड़के वापस जाओ
मेरे होते ना घबराओ
रण चंडी बनकर जाओंगी
रत मैं
उनका पी जाओंगी
मेरे हातों नहीं बचेंगे
कहीं भी दानव नहीं बचेंगे
परवती मा क्रोध में
आकर काल रात्र का रूप धार कर नाचने लगी महकाली मा
काली खपपर वाली है मा नेत्रलाल विक्राल
हो गए
विखरे विखरे बाल हो गए नरमुंदो की पहन के माला
लग रहा रूप डराने
वाला बड़ी भयंकर लग रही माता
जोपरले अंकर लग रही माता
मारिठहा का हुंकारे मा
मारिठहा का हुंकारे मा नागिन जैसे हुंकारे मा
अष्तर शस्त्र हातों में
लेकर चली गगन में माता उड़कर
काल रात्री का रूप धार के लग रही काल
समार रोधरानी कल्यानी जैज़े काल रात्री मा
रोधरानी महरानी जैज़े काल रात्री मा
पहुच गई मा रण भूमी में रण चंडी मा रण भूमी में शुम्भ नि
शुम्भ कुमार घिराया चंड मुंड दान वदल आया उनको मा ललकार रही है
दोनों तरफ से वार चल रहें तीर और तलवार चल रहें
कट कट शीश गिरे धर्ती पर रत की धार बहे धर्ती पर
चंड मुंड दानव बलशाली दानव थे वो शक्ती शाली
रण भूमी में लड रहें दोनों काल रात्रि से भिड रहें दोनों
शुम्भन शुम्भ को मारा
माने दोनों को
संगारा माने
दोनों के धड काट दिये थे
दो टुकडों में बात दिये थे
क्रोध में माता काप रही थी
असुरों की गर्दन नाप रही थी
मार गिराया दानव दल को
काट गिराया दानव दल को
रक्त बीज को मिली सूचना रणभूमी में कोई बचाना
रक्त बीज फिर क्रोध में आकर हाथों में तलवार उठाकर
क्रोध में आग उगलताया रणभूमी मैदा
जैजेकाल रात्री माँ
जैजेकाल रात्री माँ
रक्त बीज जब रण में आया
बन गई महाकाल महमाया एक दूजे पर तूट पड़े वो बन के
जुआला फूट पड़े वो
वार चल रहे तलवारों के शोर उठ रहे
टंकारों के रक्त बीज का रक्त जो गिरता
रक्त बीज फिर से
एक बनता माता कुछ भी समझ सके ना
रक्त बीज उकी बढ़ रही
सेना काले रात्र की समझ ना आये
इनका अन्त समझ ना
पाए रक्त पिशाचनी बन गई माता
जैसे डाकिनी बन गई
माता खफर खड़क उठाके माता बन गई काल समाल
रोधराणी महराणी जैज़े काल रात्रि माँ
रक्त बीजों के शीष काट कर
रक्त पी रही भरभर खफर
गुप्त शक्तियां साथ चल रही
काल रात्र के साथ चल रही
क्रोध में मा चिंघाड रही है
मन की शेर निदहाड रही है
जोर जोर अत्हास लगाए
रक्त पिपासा मा बन जाए
रक्त ना उसका गिरने देती
रक्त बीज ना बनने देती
एक एक कर कटते जाते
रक्त बीज सब घटते जाते
खड़क से गर्दन काट रही थी
रक्त मसारा चाट रही थी
लाखो रक्त बीज संघारे बचे ना उसके प्राँध
कल्यानी रोधराणी जै जै काल रात्रि मा
लाखो राजिनी जै जै काल रात्रि मा
जै जै काल राजिनी जै जै काल राजिनी जै जै काल राजिनी
कौई
नहीं रोकने वाला कौई नहीं रोकने वाला
गलती चली जा रही आग गलती चली जा रही कोई अगर सामने आता
कोई अगर सामने आता ग्रोध की जुआला में जल जाता ग्रोध की
जुआला में जल जाता शिवशंकर भगवान आते हैं शिवशंकर भगवान
आते हैं उनकी राह में गिर जाते हैं उनकी राह में गिर जा
शिवशंकर की छात के ऊपर गलती से माने पाव दिया धर
जटके से जब नीचे देखा
माने कभी न ऐसा
सोचा उनकी पाव के नीच पड़े थे शिवशंकर भगवान
कल्यानी रोधराणी जैज़े काल रात्रि माँ
रोधराणी महराणी जैज़े काल रात्रि माँ
रोधराणी महराणी जैज़े काल रात्रि माँ
गल्ती का
अभास हो गया उनको ये एहसास हो गया
बच्चतावे में जीब
निकाले शांत हो गयी थी महकाली
शिवशंकर से करे प्राथना मांग रही माँ च्छमायाचना
मांग हो गयी निर्मल शीतल नहीं क्रोध की रह गई हल चल
काले रात्रि माता की जैहो
माता सुखदाता की जैहो
काले रात्रि माता कल्याणी
धन्वे भवदाता वरिदानी
दया करो सुखदेव के ऊपर माता दया निधा

XEM TOÀN BỘ
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🧑: Rinky Vishwakarma

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