Skandmata Mahima

🧑‍🎤: Devesh Kundan

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⏱: 00:00:00 AM 21/03/2026

हन्सुवाहिनी शार्दा
विनकरो
सुईकार
हन्सुवाहिनी शार्दा
विनकरो सुईकार
करके तयामा खोल दो
शब्तों के भंदार खोल दो
चरण वन्दना मैं करूँ
हे गन्पति भगवान
चरण वन्दना मैं करूँ
हे गन्पति भगवान
असकंद माता की
कथा
करने
चला बयान
गन्पति करने चला बयान
पांच्व दिन नवरात्र का असकंद माता के नाम
असकंद माता जी
अपको
बारंबार प्रणाम
करूँ मैं
बारंबार प्रणाम
असकंद माता तुम हर समयं
रहती सिंग
सवार
असकंद माता तुम हर समयं
रहती सिंग सवार
ममतमै मारूप है
और भुजाएं चार सदा तुम
रहती सिंग सवार
कार्ती के ये हैं गोद में जो असकंद कहाई
असकंद भावन छवीलाल की
मंद मंद मुस्काई कार्ती के
मंद मंद मुस्काई
तार कसुर के नाम का
असुर बड़ा बलवा
तार कसुर के नाम का
असुर बड़ा बलवान
आताताई के रूप में थी उसकी पहचान तार का सुर था बड़ा बलवान
करके तपस्या ब्रह्माजी की मांग लिया वर्दार
करके तपस्या ब्रह्माजी की मांग लिया वर्दार
देवी देव के हातों से
ना जाएं मेरे प्राण मुझे दो तुम ऐसा वर्दार
नर नारी से ना मरूं ना ही किसी के हाथ
मुझे को ये वर्दान दो ब्रह्मधेव जी आज
ये वर्दो
ब्रह्मधेव जी आज
शिवशंकर का पुत्र ही
ले सकता मेरे प्राण
शिवशंकर का पुत्र ही
ले सकता मेरे प्राण
मुझे और दूजा नहीं कर सकता निस प्राण दूसरा ले न सके मेरे प्राण
तार का सुर्था जानता
शिव न करेंगे ब्याँ
इसी लिए ब्रह्मधेव से उसने जताई चाहुरिदै की उसने जताई चाहुरिदै की
उसने जताई चाहुरिदै की उसने जताई चाहुरिदै की
पचेगी बासूरी
जब न होगा पास कैस पचेगी बासूरी
जब न होगा पास मांग के मैं वरगान ये
चैन किलूँगा सास ब्रह्मधाजी
चैन किलूँगा सास
असुर को वर्दे कर हुए
ब्रह्मधाजी अन्तर ध्याँ
तार कसुर के अन्दर का
जाग उठा शैतान तुरंत ही जाग उठा शैतान
देवों पर करमें लगा
असुर वो अत्याचार
इंद्र लोक पे हो चुका था उसका ही अधिकार कर लिया उसने वहाँ अधिकार
इंद्र देव बचते फिरें
लेके अपने प्राण
इंद्र देव बचते फिरें
लेके अपने प्राण
पीछे पड़ गया
तार कसुर शैतान पड़ गया
तार कसुर शैतान
देवों के हित के लिए
शिवने किया विवाँ
जन्म हुआ कार्टी के कार्टी देव हुए खुश हाल
जन्म हुआ कार्टी के कार्टी
देव हुए खुश हाल
करेगा वत शैतान का पारवती का लाल करेगा पारवती का लाल
युद कलारण नीति का
दे रहे शिव जी ग्या
कार्टी के जी सीखते
युद कला का सार
कार्टी के जी सीखते
युद कला का सार
गए
सीख त्रिशूल भो और तीर तलवार सीख गए तीर और तलवार
निपुन हो गए युद में
कार्टी के युद भगवार
निपुन हो गए युद में शीख कार्टी के युद भगवार
युद कला में हो गए
सब से बड़े
बलवान कार्टी के सब से बड़े बलवान
माता पारबती का
दूसरा असकंड माता है नाव
कार्टी के संग चल पड़ी
करने युद अविराम चल पड़ी लडने को अविराम
असुर खड़ा था सामने
हसे ठहा का माद
असुर खड़ा था सामने
हसे ठहा का माद
हरी थी उसके साथ में सेना कई हजार
हरी थी
सेना कई हजार
कार्टी के जिरन भूमी में कर महा संग्राब
कार्टी के जिरन भूमी में कर महा संग्राब
कार्टी के जिरन भूमी में कर महा संग्राब
कर रहे योधा वीर असुर के कट रहे योधा वीर
पार्वती मारन भूमी में दे रही पूत्र का साथ असुरों को ललकार थी
सस्त्र उठाके
हाथ लड रही
सस्त्र उठाके हाथ
सस्त्र उठाके हाथ
सस्त्र उठाके हाथ
तार कसूर कार्टी के को
रण में रहा ललकार
तार कसूर कार्टी के को
रण में रहा ललकार
तार
कसूर की चात के पार हो गया शूल क्रोध में छोड़ दिया त्रिशू
तार कसूर की चात के पार हो गया शूल क्रोध
में छोड़ दिया त्रिशू
तार कसूर मारा गया
कार्टी के एक हाथ
देव लोग करने
लगे
फूलों की
बरसात हो रही
फूलों की बरसात
कार्टी के भगवान की हो रही जैजैकार
कार्टी के भगवान
की
हो रही जैजैकार
स्वर्ग लोग पर हो गया
देवों का अधिकार हो गया
देवों का अधिकार
कार्टी के जीने कर दिया
तार कसूर का अन्हू
कार्टी के जीने कर दिया
तार कसूर का अन्हू
चुपते थे जिस से देवता
भैखाते अत्यंत असूर से भैखाते अत्यंत
असकंद माता
राणि जी
चार भुजा धारी
जी नाखती मन भावन रूप है
लगता है मन हारी भवानी
लगती है मन हारी
खाट कर दिके जी दो हाथों में फूल एक हाथ कर दिके जी
दो हाथों में फूल
एक हाथ बर मूद्र में भक्तों के अनुपूल हाथ है
भक्तों के अनुपूल
पाँच्व दिन नवरत का
असकंद मा के नाँ
जोत तुम्हारे नाम की घर में जगे शुबो शाम जोत मा जगे तुम्हारे नाम
फूलों सी कोमल हो तुम्हुं शीतल जलधार
दियों से संसार में लुटा रही हो प्यार है माता लुटा रही हो प्यार
असकंद मा की
वन्दना
करता है संसार
फसे है जो मजधार में मा
रही है पार उतार सभी को मा रही पार उतार
शिवशंकर की भारे आमा आदि शक्ति कहलाई
शिवशंकर की भारे आमा आदि शक्ति कहलाई
महशक्ति के रूप में घर घर पूजी जाए भवानी घर घर पूजी जाए
जोत जगे जिस घर तेरी वो घर स्वर्ग समाँ
बिन बोले बरसा रही उस घर में वर्दान है देवी घर है स्वर्ग समाँ
चरन वन्दना जो करे
प्रातह संध्या काल
चरन वन्दना जो करे
प्रातह संध्या काल
माता तुम हो काटती
उसके बनधन जाल काटती उसके बनधन जाल
हात जोड विन्ती करूमा
रख दो सर पर हाथ
हात जोड विन्ती करूमा
रख दो सर पर हाथ
करू तुम्हारी चाकरी असकंड मा दिन रात तुम्हारी
पूजा करू दिन रात
चरन शरन सुक्देव है हर संकत दो टाल
चरन शरन सुक्देव है
हर संकत दो टाल
देव सिकुंदन को
माता
कर दो माला माल पूत्र को
कर दो माला माल

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